Melting Boundaries (Pighalte Dayre)

कुछ दायरेकुछ रस्मों रिवाजमेरी हदें तय किया करती हैं मेरा वजूदमेरा मज़हबमेरी पहचान बताया करती हैं मुझे कहाँ जाना हैमुझे क्या करना हैअक्सर ये बयान करती हैं किनारों में रहकर महफ़ूज़ रहा हूँमुक़र्रर मंज़िल की तरफ़ लाचार बहता रहा हूँअपनी पहचान भूल, खारा हो गया हूँ समंदर मेरी मंज़िल नहींमैं कोई दरिया भी नहींमैं तोContinue reading “Melting Boundaries (Pighalte Dayre)”

Khali haath aaye the, Khali haath jayenge

कौनसा पिटारा लेके जाओगे क्या क्या पसंद आया है कितनी लम्बी उम्र है उसमें कितनी ज़िंदगी है समेटने में उम्र गुज़ारी है इन संदूक़ों का क्या होगा बहुत भारी हो गयी है इस भोझ का क्या होगा दुआओं का पिटारा भरना है खवायिशों का पेट कहाँ भरा है हाथ ख़ाली रहने वाले हैं जहां अगलेContinue reading “Khali haath aaye the, Khali haath jayenge”

Koshish

किसी ने की कोशिशदो कदम चलने कीउस नुक्कड़ पर फिर से मिलने कीकोई कदम पहुँचे ही नहीं किसी ने की कोशिशलिखे ख़त को पड़ने कीपन्नो पे महके अल्फ़ाज़ समझने कीकुछ ख़त लिफ़ाफ़ों से निकले नहीं किसी ने की कोशिशदबी आवाज़ को सुनने कीअनकहे लफ़्ज़ों को समझने कीकुछ शोर अनसुने ही रहे किसी को सुनाई दियाकिसीContinue reading “Koshish”

Let’s paint the fence

Fence separatesthe insideFrom what liesOn the outside What stays within it’s boundOr What lies outsideIt’s not for the fenceto judge or decide It stays on the fringeIn touch with either sideNot the one to connectOnly built to divide It’s one fenceWith two sidesOne is with the insideOne faces the outside One side restrictsThe other sideContinue reading “Let’s paint the fence”