Alive

किस बात का गम हैकिस बात की है ख़ुशीक्यूँ आज आँखें नम हैऔर होंठों पे है हँसी किसका इज़हार करते हैंक्या है जो छुपाते हैंकौनसा सच हैंऔर किसको सच समझ जाते हैं ऐसा मातम क्यूँ हैकिसके जनाज़े पर गए हैं सभीसाँस शायद रुख़ गयीं हैपर ज़िंदा हूँ में अभी

Udaan

ऊँचायीयों से डर लगता है गिरने का खौफ है उड़ने का हुनर, सीखा नहीं गिरने का शोक है क्या फ़रक है कौनसा सही एक उभरता है एक ढलता है दोनों सिरों में डोर तो एक है एक पाने में जुटा है एक खोने में खुश है

ग़लत फ़हमी

ड्रॉइंग रूम में सजी मूरतजो किसी कारीगर कीनायाब कारीगरी थीजिसे मजबूर हो करबेचा था उसनेआज वो मेरी है धूल से लथपथअपने गले परअपनी क़ीमत लटकाएजो कभी दुकान के कोने मेंबेज़ुबान पड़ी थीआज वो मेरी है मोल देकर ख़रीदा हैमालिक बदल गया हैना पूछा इस बेज़ुबान सेना ज़रूरत समझीकिसी और की ज़िंदगी का हिस्सा थीआज वोContinue reading “ग़लत फ़हमी”

Shayad

कुछ लिख देता हूंयूं हीअपने सच्चे झूठे अल्फ़ाज़बस यूं ही तुम्हें पसंद आयातो लगा शायदअच्छा होगा तुमने मानातो लगाशायदसच्चा होगा किसको फर्ककिसको परवाहक्या सचऔर किसका सच पर ये तो सच हैकी एक एहसास जो मेरा थाअब हमारा है इसी सच परयकीन हैइसी भरोसे परये नई मोहिम है कुछ और लिख रहा हूंये सोच करतुम्हे पसंदContinue reading “Shayad”

Phir ek baar

फिर वही दिनजीना चाहता हूंफिर वही राहों सेगुजरना चाहता हूं हर उस पल को महसूस करना चाहता हूंजैसा था, जैसा हुआबस वैसा ही रखना चाहता हूं हर खुशी और गम के लम्हों कोफिर एक बार चखना चाहता हूं कुछ छोटेकुछ लंबेकदमों के निशान परफिर चलना चाहता हूं कुछ बदलने की ख्वाइश नहींकोई शिकवा कोई शिकायतContinue reading “Phir ek baar”

मुखौटे

ऐसा कुछ है जो भूल गया शायद कोई बात है जो कहते कहते रह गया। थोड़ी हिचक थोड़ी शर्म रोक टोक और अनदेखा भ्रम। ज़िन्दगी की सीख से चुनी रसमों की दीवारों में सही और गलत रंग की सियाही से लिखे दकियानूसी रिवाजों ने एक एक कर दफनाया है कई सहमें से ख्वाबों को। ऐसेContinue reading “मुखौटे”

वक्त है, गुज़र जाएगा

लो आगया छुट्टी का दिनलगता दूर था महीने पहलेजैसे कभी नहीं मिलेंगे इस दिन से, कई दिनों तककई अरमान बुने थेये करेंगेउनसे मिलेंगेदेर तक बातें करेंगेपर ये समय है कि मानता नहींरेंगता, कभी भागताबस चलता रहता हैकुछ पल लगाथोडा और जी लेंकुछ पल को, थोड़ा रोक लेंऐसी उम्मीद, उम्मीद ही रह गईकुछ अरमान पूरे हुएकुछContinue reading “वक्त है, गुज़र जाएगा”

Aaj Vela hoon

आज अकेला हुंसुबह से वेला हूंदुनिया को बचानेअपने घर पे सोयेला हूं भ्रमण कर आजघर वापस आया हूंकश्मीर से कन्याकुमारी का सफरवास्तव में कर आया हूं इंसान को ६ फीट दूर से देखा तोथोड़ा डरा हुआ पाया हैहर आंखों में शक और कौफ का साया भरपूर नजर आया है इस नासूर वायरसका वास्ता है डरContinue reading “Aaj Vela hoon”