Tum toh main hoon

क्यों चाहता हूँ तुमकोतुम तो मैं हूँ पाने की ख्वाहिश नहींतुम तो मैं हूँ खोने का ख़ौफ़ नहींतुम तो मैं हूँ क्या सुनना हैबस शोर हैशोर इतना गूंजाकी खामोशी हो गयी तुमसे मुलाक़ात जो हुईखुद से पहचान हो गयी

Tum ho

तुम वो रात होवो नींद होतुम वो सुबह होतुम यहीं हो ख़्वाब होसाँस होयहीं मेरे पासहर पल में हो वो धुन होजिसे गुनगुनाया हैवो याद होजिसे मुस्कुराया है तुम हो वहाँजहां मंज़िल हैक़रीब हो, दूर होजहां जाना है मेरा कौन होक्या नाम रखूँरिश्ता नहींमेरी पहचान हो तुम आज होमेरा कल भीक्या और है मुझमेंमेरा सबContinue reading “Tum ho”

Dark Coffee

Fluid Pours outWarm and brewedFrom the potInto the expectant gobletWaiting impatientlyLike a tired mind Crystals of sweetBlend like magicInto the Juiceof dark bitter beandark brown fluidLooks pretty fine The aroma risesHarbinger of the tasteScales the chasmbetween the cup and lipOh that smelltriggers the mind The first siptastes like heavenCataputing me awayFrom the grimeI am pureContinue reading “Dark Coffee”

Aakhon ka Kasur

ये आँखेंसब देखती हैक़सूर क्या इनका हैमन का शीशा हैजो बिखरा हुआ है कौन सी बातें हैंजो कहें हमजो अछी लगेंशब्दों का ज़ायक़ाकुछ बिगड़ा हुआ है सारा जहां ज़हन में हैक्यूँ फ़िज़ूलजमाने से ख़फ़ा हैंमन का चश्मा हैजो ज़रा पोशिदा है

I am home

The house stood tallProud and elegantLike it’s been waiting The swing watchedQuite and staticLike it’s been waiting The porch extended its armpainted freshly redDressed elaborately to receive The demon face smilesVainly trying to scareGrossly unable to deceive The furniture sits calmlySure of us to sit with themYet a bit impatient The calendar marks the dateCrossingContinue reading “I am home”