Tum toh main hoon

क्यों चाहता हूँ तुमकोतुम तो मैं हूँ पाने की ख्वाहिश नहींतुम तो मैं हूँ खोने का ख़ौफ़ नहींतुम तो मैं हूँ क्या सुनना हैबस शोर हैशोर इतना गूंजाकी खामोशी हो गयी तुमसे मुलाक़ात जो हुईखुद से पहचान हो गयी

Amma ka phone aaya

अम्मा का फ़ोन आयाहाल चाल पूछामौसम का हाल भी समझाफिर कुछ और कहना चाहातो हमने कहाआज थोड़ा व्यस्त हूँकल काल करूँगा अम्मा चुप हो गयीकहते कहते रुक गयीऐसा हर बार सुना थापर इस व्यस्त होने का तर्कउनको कुछ विपरीत सा लगाकई सवाल मन में उठेकल और आज में फ़रकबहुत गहरा नज़र आया बेटा, ये कैसाContinue reading “Amma ka phone aaya”

Tum ho

तुम वो रात होवो नींद होतुम वो सुबह होतुम यहीं हो ख़्वाब होसाँस होयहीं मेरे पासहर पल में हो वो धुन होजिसे गुनगुनाया हैवो याद होजिसे मुस्कुराया है तुम हो वहाँजहां मंज़िल हैक़रीब हो, दूर होजहां जाना है मेरा कौन होक्या नाम रखूँरिश्ता नहींमेरी पहचान हो तुम आज होमेरा कल भीक्या और है मुझमेंमेरा सबContinue reading “Tum ho”

I am home

The house stood tallProud and elegantLike it’s been waiting The swing watchedQuite and staticLike it’s been waiting The porch extended its armpainted freshly redDressed elaborately to receive The demon face smilesVainly trying to scareGrossly unable to deceive The furniture sits calmlySure of us to sit with themYet a bit impatient The calendar marks the dateCrossingContinue reading “I am home”

Khwabon ka zayaka

ज़ायक़ा शायदवैसा ही होगाजैसा चखा थाउन महकते ख़्वाबों में बदन की ख़ुशबूमन की महकजुड़ से गए हैंइन सिसकती साँसों में असल और ख़्वाबमें फ़रकथोड़ा धुंधला गया हैइन उलझे ख़यालों में भूल गया हूँक्या सच है क्या ख़्वाब हैमगन हूँ में बसउन साँचे एहसासों में एक निवाला प्यार काशिद्दत से चखा हैअसल का तो पता नहींशायदContinue reading “Khwabon ka zayaka”